किताब के बारे में:

“फिर , क्यों उसने मना किया….?” सिर्फ एक कहानी नही है । यह सीख है हर उस नौजवान युवक और युवती के लिये जो प्रेम में मिले धोखे का नाम लेकर अपने जीवन की राह से भटक कर बर्बादी की राह पर चले जाते हैं ,और तोड़ देते हैं अपने और अपनों के ख्वावों को ।

लिखावट और वर्णन:

लिखावट और वर्णन दोनों ही बेहद अच्छे हैं इस पुस्तक के । लेखक ने हर एक चरित्र व् scene को काफी अच्छे तरीके से दर्शाया है । हाँ कहीं कहीं कुछ स्पेलिंग में गलतियां थी लेकिन उसके आलावा सब काफी अच्छा था ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक आवरण और शीर्षक मुझे दोनों ही अच्छे लगे ।

पेशेवर:

  • सरल भाषा
  • प्यारी सी कहानी
  • अच्छी सीख

विपक्ष:

मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगा

मेरा फैसला:

इस पुस्तक में यूँ तो आपको बहोत ही प्यारी प्रेम कहानी पढ़ने को मिलेगी – विवान और काव्य की – हालाँकि इसमें लेखक ने बहोत ही सरल व् सीधे ढंग से पागल प्रेमियों के लिए एक पाठ भी लिखा है । बहोत ही सीधी व् प्यारी कहानी है । चाय की चुस्कियों के साथ काव्य व् विवान की प्रेम कहानी पढ़ने में मज़ा आ जायेगा आपको ।

रेटिंग्स: 3.5/5

खरीदिये: फिर, क्यों उसने मन किया?

ओमकार जी से बातचीत

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