प्रश्न:- आप पाठकों को अपने बारे में कुछ बताएं |

मुझे बचपन से ही लेखन में रूचि है इसलिए मैंने लेखन को ही चुना और इसी में अभिरुचि के चलते मैं निरंतर लेखन में अपना योगदान देना चाहता हूं ।

प्र. यह किताब लिखने का ख्याल आपके मन में कैसे आया?

समाज की युवापीढ़ी में पनपती बुराइयों को देखकर ।

प्र. इस किताब को लिखने की आपको प्रेरणा कहाँ से मिली ?  

युवापीढ़ी की विगड़ती दशा को देखकर मेरे मन को प्रेरणा मिली और मैं समाज के लिए लेखन शुरू किया ।

प्र. आपकी किताब क्या बताती है? 

हमारे उपन्यास का वास्तविक उद्देश्य समाज के युवाओं को वास्तविक सच्चाई और वास्तविक प्रेम से रु-ब-रु कराना है ।

प्र. जब आप ये किताब लिख रहे थे तब आपके मन में क्या चल रहा था?  

इस पुस्तक को लिखते समय मेरे दिमाग में एक ही ख्याल था कि मैं इस समाज के युवक और युवतीयों को उनके जीवन लक्ष्य से भटकने नही दूंगा ।

प्र. आपने इस किताब को कितना समय दिया?  

यह पुस्तक मेरे तीन बर्षों के परिश्रम का परिणाम है ।

प्र. क्या कोई ऐसा पल आया जब आपने सब छोड़ने का मन बना लिया हो?

नही मेरे मन में कभी ऐसा विचार नही आया की मैं इस किताब को लिखने से पीछे हटूं । बल्कि मैंने इसे जल्द से जल्द पूर्ण करने के लिए दिन रात मेहनत भी की ।

प्र. आलोचना को कैसे सँभालते हैं?

हम हर व्यक्ति द्वारा की गयी आलोचनाओं  का सम्मान करते हैं और उनके द्वारा सुझाए गए आवश्यक सुधारों को अपने लेखन में सम्मलित करते हैं ।

प्र. नए लेखकों को क्या राय देना चाहेंगे ? 

मैं अपने सभी नए साथियों को यह सलाह देना चाहूंगा कि कोई भी लेखक जो इस लेखन की दुनिया में आना चाहता है तो उसका उद्देश्य मान – सम्मान या धनार्जन करना नही होना चाहिए । यदि वह कला के प्रति ,अपने लेखन के प्रति लगाव रखता है तभी वह सफल लेखक बन सकता है । 

पुस्तक समीक्षा – फिर, क्यों उसने मन किया?

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