किताब के बारे में:

आईना की रचनाओं के माध्यम से, समाज को सत्य एवं यथार्थ कहने का, मेरा अदंभ प्रयास है ।
कृतियों में, आम बोलचाल की हिंदी और उर्दू भाषाओँ का प्रयोग किया है । भाषा सरल व् सुबोध है । मेरी कोशिश है की गंगा जमुनी संस्कृति की बयार निरंतर बहती रहे ।
रिश्ते, इश्क़ और मोहोब्बत ज़िन्दगी की खूबसूरत हकीकत है । इनमें जज़्बात और क़ुरबानी का होना बेहद जरुरी है । इस सचाई से रूबरू करने का प्रतियां है ‘आईना’ ।

लिखावट और वर्णन:

कवी ने बहोत ही तरीके और लिहाज़ से हर एक शब्द को पिरोया है । मुझे लिखावट और वर्णन दोनों ही काफी पसंद आये ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

शीर्षक किताब से मेल खाते हैं परन्तु आवरण कुछ और बेहतर हो सकता था ।

पेशेवर:

  • सरल भाषा
  • दिलचस्प शब्द
  • बेहद खूबसूरत रचना

विपक्ष:

मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगा

मेरा फैसला:

जब बात उर्दू की आती है, तो बेहद की काम ऐसे कवी हैं जिनकी रचना मुझे पसंद आती है । स्वदेश जी उन में से एक हैं । इनके शब्दों में कुछ बात तो जरूर है की दिल महक जाता है । तो अगर आप भी उर्दू के फैन हैं, तो ये पुस्तक आपके लिए है ।

रेटिंग्स: 4/5

खरीदिये: आईना

स्वदेश जी से बातचीत

Advertisements