किताब के बारे में:

इसकी कहानी दो अख़बारों के बीच वर्चस्व की लड़ाई, पत्र – पत्रकारिता और नेताओं की मीडिया के प्रति नज़रिये पर केंद्रित है । यूँ तो इसकी कहानी सत्यता के काफी करीब है, फिर भी रोचक बनाने के लिए कल्पना का सहारा लिया गया है । कहानी फ़िल्मी शैली में लिखी गयी है । इसमें सस्पेंस, एक्शन, हॉरर, कॉमेडी, रोमांस, प्रेम-चाहत, नफ़रत, बदला, गाने आदि शामिल है ।

लिखावट और वर्णन:

इस पुस्तक की कहानी का वर्णन काफी अच्छे ढंग से किया गया है । लिखवत भी अच्छी है ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

शीर्षक और आवरण दोनों ही किताब से मेल खाते हैं ।

पेशेवर:

  • सरल भाषा
  • दिलचस्प संकल्पना
  • नियमित कहानियों से अलग

विपक्ष:

मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगा

मेरा फैसला:

एक रिपोर्टर की ज़िन्दगी से आयी हुई इस कहानी से हम क्या उम्मीद रख सकते हैं । यह किताब इतने हद्द तक दिलचस्प है की आपका इसको छोड़ने का मन ही नहीं करेगा ।

रेटिंग्स: 4/5

खरीदिये: रिपोर्टर

अवधेश कुमार जी से बातचीत

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