किताब के बारे में:

चित्रलेखा (चित्रा) हमेशा दूसरों के दुःख दर्द व् हक़ के लिए लड़ने वाली बुलंद ख्यालात, निर्भीक, विवेकशील गावं की भोली भली लड़की है । जान छिड़कने वाले पति और बच्चों से भरे-पुरे परिवार के बावजूद भी उसे गौरीव नाम के लड़के से प्रेम हो जाता है । संसार और समाज में तुच्छ और घृणित समझे जाने वाले इस आत्मीय और पुनीत प्रेम को चित्रा ने कैसे अपने कर्म और विचारों के द्वारा फलक पर बिठाकर मुकदस बना दिया । इसके साथ ही तमाम तोहमतों और दुशवारियों के बावजूद भी उसने कैसे अपने प्रेम की एक मुकदस इबादत लिखी । जानने के लिए पढ़ें….चित्रलेखा एक मुकदस प्रेम कहानी ।

लिखावट और वर्णन:

लिखावट और वर्णन दोनों ही अच्छे हैं, लेकिन कहीं कहीं कहानी दर्शाने में कुछ ऊंच नीच हो गयी ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

शीर्षक और आवरण दोनों ही किताब से मेल खाते हैं ।

पेशेवर:

  • सरल भाषा
  • समाज के बंधनो को तोड़ती कहानी

विपक्ष:

कुछ और बेहतर हो सकती थी कहानी

मेरा फैसला:

समाज के नियम और कानूनों को तोड़ने वाले बहोत लोग नहीं हैं । लेकिन इस कहानी से लेखक ने एक ऐसी लड़की को दर्शाया है जो ज़िन्दगी से कुछ ज्यादा ही चाहती है । कहानी अच्छी है और आपको आकर्षित करने में कायम होगी ।

रेटिंग्स: 3.5/5

खरीदिये: चित्रलेखा

अमर ‘अरमान’ से बातचीत

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