किताब के बारे में:

इस किताब में अनकहे शब्दों को कवयित्री ने बहोत ही अच्छे ढंग से पेश किया है । हर एक कविता मन को छू जाती है । बहोत ही अच्छे ढंग से लिखा गया है ।

लिखावट और वर्णन:

लिखावट और वर्णन दोनों ही बहोत अच्छे हैं । हर एक शब्द से बेहद्द ही अच्छे भावों का पता लगता है । 

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

शीर्षक किताब के पन्नो से मेल खाता है एवं आवरण बहोत ही सिंपल व् खूबसूरत है ।

पेशेवर:

  • सरल भाषा
  • सुन्दर शब्दों का प्रयोग
  • सटीक कवितायेँ
  • दिल को छू लेने वाले भाव

विपक्ष:

कुछ भी बुरा नहीं लगा इसमें

मेरा फैसला:

कईं कईं बार हम बहोत से ऐसे अवस्था में फस जाते हैं जहाँ हम नचाहते hue भी कुछ नहीं बोल नहीं पाते । कहना तो बहोत कुछ होता है लेकिन शब्द मिल नहीं पाते । इस पुस्तक के ज़रिये और इन कविताओं के ज़रिये, कवित्रयी ने सराहनीये भावनाओं को आगे रखा है । बहोत ही अच्छे ढंग से लिखी हुई ।

रेटिंग्स: 4/5

खरीदिये: अनकही

In Conversation with Suchi “Versha” Shukla

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