हम कितना खुश होते हैं जॉब कोई हमें अपने परिप्रेक्ष्य से देखने की कोशिश करता है । ये किताब भारत के आम आदमी की कहानी बताती है । और यह नॉन-फिक्शन और पोएट्री का बहोत अच्छा मेल भी है । हर आम आदमी की एक धारणा, विचार, और दृष्टिकोण होता है । सब अमीर खुश नहीं होते, और सब गरीब दुखी नहीं होते । अब, चलिए जीते हैं एक आम आदमी की ज़िन्दगी जो अपने सपने अपने परिवार व् देश के लिए त्याग देता है ।

किताब के बारे में:

जब आप आम आदमी के बारे में सोचते हो – तो सबसे ज्यादा उनकी परेशानियां, त्याग, व् बहोत साडी दूसरी अच्छी व् बुरी खूबियां सामने आती हैं । इस पुस्तक में सरे भावों को बहोत ही अच्छे से दर्शाया गया है । आम आदमी की परेशानियों को लिखने का ढंग दिल को छू लेने वाला है ।

लिखावट और वर्णन:

लिखावट और वर्णन दोनों ही बहोत अच्छे हैं । हर एक शब्द से बेहद्द ही अच्छे भावों का पता लगता है । लेखक ने जिस तरह से इन कहानियों व् कविताओं को पेश किया है वो बेहद्द ही बेहतरीन है ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

शीर्षक किताब के पन्नो से मेल खाता है एवं आवरण बहोत ही सिंपल व् खूबसूरत है ।

पेशेवर:

  • सरल भाषा
  • सुन्दर शब्दों का प्रयोग
  • सटीक कहानिया व् कवितायेँ
  • दिल को छू लेने वाले भाव

विपक्ष:

कहीं कहीं कहानियों के वर्णन में कुछ गलतियां हो गयी ।

मेरा फैसला:

यूँ तो हम सब आड़ आदमी ही हैं, लेकिन कभी कभी हमें नहीं पता चलता की दूसरा इंसान किन किन चीज़ों से गुज़र रहा है । इस पुस्तक में लेखक ने भावों को सटीक प्रकार से दर्शा कर पाठाकों के मन को छूने का फैसला किया है । अवश्य पढ़ने वाली पुस्तक है ।

रेटिंग्स: 4/5

खरीदिये: आम आदमी की ज़िन्दगी

In Conversation with Sunny Raone

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