इस कहानी के सभी पात्र व् घटनाएं काल्पनिक बिलकुल भी नहीं हैं । इस कहानी में जो भी घटनाएं हैं वो सत्य है । मैंने सिर्फ किरदार के नाम बदल दिए हैं ।

यह कहानी एक बेवकूफ की है जिसे इंग्लिश भाषा में इडियट कहते हैं । इडियट… वो इसलिए क्युकी वो एक ही गलती बार बार करता है वो है दूसरों की परवाह करना ।

परवाह करना, सुनने में जितना आसान लगता है, उससे निभाना उसे kahin ज्यादा मुश्किल है पर मैं तो ठहरा इडियट और इडियट के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं होता । मुझे तो बस वो करना है जो मैं करना चाहता हूँ । फिर दूसरे कितना भी मज़ाक उड़ाएं, उससे मुझे फर्क नहीं पड़ता है क्युकी जब वो लोग मुझपर हस्ते हुए हार नहीं मानते तो फिर मैं उन्हें हसाते हुए हार क्यों मान लू? मैंने तो यह भी सुना है की दूसरों को हसना, इस दुनिया का सबसे अच्छा काम है । फिर तो हार मैंने का सवाल ही पैदा नहीं होता ।

मेरा मन्ना है, आप किसी की परवाह तभी कर सकते हैं, जब आपके दिल में प्यार बस्ता हो और ईश्वर ने मुझमें प्यार कूट कूट कर भरा है । इसी प्यार की खुशबु के साथ एक दिन मैं अपनी प्रेमिका की तलाश में फेसबुक से जा मिलता हूँ और उसके बाद जो घटनाएं घाटी हैं वो तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था और उन घटनाओं के बारे में जब आप जानोगे, तब कभी आप है है के लोट पॉट हो जाओगे तो कभी संजीदा हो जाओगे।

ये फेसबुक है, जो मुझे बेवकूफ से इडियट बना देता है । आप कहेंगे की बेवकूफ कहो या इडियट, मतलब तो एक ही है, इसमें नयी बात क्या है ? तो मेरा जवाब होगा, आप ये किताब पढ़िए, नयी बात आपको खुद समझ में आ जाएगी ।
तो पेश करता हूँ मैं, एक बेवकूफ की कहानी, एक इडियट की ज़ुबानी…

किताब के बारे में:

वैसे तो ये कहानी में कुछ ज्यादा खास न भी हो, लेकिन जिस ढंग से इसे प्रदर्शित किया गया है, वह बहोत ही यूनिक और इंटरेस्टिंग है । यह किताब में बहोत सी अच्छी बातें भी लिखी गयी हैं । इसमें हास्य, प्यार, दूरियां, जैसे बहोत सरे भाव व्यक्त किये गए हैं ।

लिखावट और वर्णन:

लेखक ने इस कहानी को बहोत ही अच्छे ढंग से दिखाया है । जिस तरह हर एक पात्र की खुबिया व् खामिया बताई गयी है वो बहोत ही मनभावक हैं ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक आवरण व् शीर्षक दोनों ही किताब से मेल खाते हैं ।

पेशेवर:

  • शब्दों का सही प्रयोग
  • सरल भाषा
  • कुछ अनूठा

विपक्ष:

लिखावट में कुछ और परिवर्तन आने से अच्छा हो सकता था

मेरा फैसला:

सच ही है, सोशल मीडिया में हमारी ज़िन्दगी इतनी बांध गयी है की हर एक पहलु इसका हमें सच लगने लगता है, चाहे फिर वो हमें बेवकूफ ही क्यों न दिखाए । अगर आप आम प्रेम कहानियों से ऊभ चुके हैं तो यह कहानी आपको ज़रूर रास आएगी ।

रेटिंग्स: 4/5

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अमित कुमार जी से बातचीत

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