प्र. हमारे पाठकों को अपने बारे में कुछ बताइये |

मैं एक साधारण लड़का हूँ! जिसे प्यार और शांति पे यकीन हैं! मेरा मानना है! प्यार और शांति ही इन्शानियत कि चाभी है! इन्शानियत कि चाभी ही मात्र एक चाभी है! जिसे आप आपने बनाने वाले से मिल सकते है! मेरा मतलब है! आप अपने इशवर से मिल सकते है!

पर ये मेरा नजरिया है! आप का क्या है? ये आप के सोच पर निर्भर करता है!

जैसा मेने कहा, मैं एक साधारण लड़का हूँ तो मुझे साधारण चीजे पसंद है!

जैसे:- तरह-तरह के पकवान खाना और कभी-कभी पकवान ना मिलने पे खुद पकवान बनना, फिल्मे देखना, जिंदगी में हमेशा इमानदार रेहना, अपने बलबूते और मेहनत से जीवन में आगे बढ़ने कि चाह रखना, विडियो गेम्स खेलना,

वीडियो गेम्स खेलना तो मुझे इतना पसंद है की मुझे जितना भी समय मिले वो मुझे कम ही परता है! अक्सर में पूरी-पूरी रात विडियो गेम्स खैला करता हूँ! क्यूँ कि दिन में मुझे समय नही मिल पता है!

तो यही सब कुछ है मेरे बारे में,

मैं एक साधारण लड़का हूँ, जिसे साधारण जिंदगी पसंद है!

प्र. यह किताब लिखने का ख्याल आपके मन में कैसे आया?

ये तो बहुत ही खतरनाक सवाल है! आसान सब्दो में कहूँगा तो कोई आइडिया नहीं था!

इस किताब को लिखने कि वजह मेरी गरीबी और मेरा सपना है! जिसने मुझे ये किताब लिखने पे मजबूर किया!

गरीबी ने मुझे यह केह के डराया “कुछ कर, वर्ना सब कुछ, कभी भी टूट के बिखर सकता है!

तो मेरे सपने ने मुझे यह केह के होसला दिया! “करना ही है तो कुछ ऐसा कर जिसे तू करना चाहता है!”

फिर क्या था! मुझे फिल्मे देखना बहोत पसंद है! और पेहले छोटी-छोटी कहानियां भी लिखा करता था! मेरे जीवन में एक समय ऐसा आया जब समय ने मुझे डरते हुए मेरे हाँथ से कीबोर्ड छीन लिया था! उसके बाद समय मुझे हर दिन नए-नए बहाने से डराता रहा और मैं रोज कायरो कि तरह डरता रहा!

फिर एक दिन मेरे सपने ने मुझे होसला देते हुए मुझे से ये कहा “कितना डरेगा? अब बस भी कर, एक दिन बिना डरे जी कर देख, तुझे जिंदगी-जीने का एहसास होगा!”

फिर क्या था? उसके बाद फिर से मेरा कीबोर्ड, मेरे हाँथ में वापस आगया और कुछ समय बाद ये किताब!

प्र. इस किताब को लिखने की आपको प्रेरणा कहाँ से मिली ?

इस सवाल का जवाब थोरा सा लम्बा होगा!

किताब लिखते समय, कई बार ऐसा समय आया था! जब मैंने खुद ही कीबोर्ड को ये केहते हुए छोड़ दिया था!

“क्यों लिखू किताब?

क्या जरुरत है इसकी?

पूरी दुनिया नाम कमा रही है! अगर मैंने भी उसमें अपना नाम जोड़ दिया तो कोन सा आठवा अजूबा हो जायेगा?

अगर कामयाबी मिल भी गई तो उन कामयाब लोगो में एक और नाम जुड़ जायेगा! जिसे दुनिया उसके काम को ढलते ही उसे भूल जायेगी! तो फिर क्यों इतना जदों-जहेद करना?

क्यूँ ना एक आसान रास्ता चुनते हुए, इस दुनियां में गुमनाम रेहता हूँ?

और एक गुमनामी कि मोंत मरता हूँ! जैसे कि मैं इस दुनिया में कभी आया ही नहीं था!

डिप्रेसन का इतना आदि हो चुका था! कि कभी गलती से आईने के सामने खुद को मुस्कुराता हुआ देख लेता तो मैं खुद से ही नफ़रत करने लगता था!

जिंदगी ऐसे ही चल रही थी! जब तक कि वो मेरे सामने नहीं आई!

जिसका नाम था “माया”!

माया एक टी.वी. सीरियल के पात्र का नाम था! पर उस पात्र को जिस तरह से दिखाया गया था! उसे देखने के बाद मैं खुद को उसका प्रसंसक बनने से रोक नहीं पाया!

माया का किरदार कोन निभा रही है! यह जाने के लिये जब मैंने गूगल किया तब मुझे उसका नाम पता चला, जो है!

जेनिफर विंगेट है! और जब मैंने उसके निजी जीवन के बारे में जानने कि कोसिस कि तब मुझे जो पता चला वो और भी ज्यादा मुझे उसके करीब ले गया!

फिर क्या था! उसी दिन मैंने यह निसचित किया कि एक दिन मुझे जेनिफर से मिलना है! पर उसे मैं तब मिलूँगा! जब मैं उसे मिलने के लायक बन जाऊंगा! ताकी उसे मुझ से मिलकर ऐसा ना लगे कि वो किसी एरे-गेरे से मिल रही है!

तो इसी कोसिस में मैंने यह किताब लिखी है! अगर मैं जेनिफर से मिल पाया तो ठीक है! वर्ना मेरे दिल में इस बात का दुःख नहीं होगा कि मैंने कोसिस नहीं की थी!

तो मैं केह सकता हूँ!

जेनिफर विंगेट से मिलने की चाह ही मेरा प्रेरणा स्रोत बना!

प्र. आपकी किताब क्या बताती है?

किताब का नाम बेवकूफ है! तो जाहिर सी बात है! यह कहानी एक बेवकूफ के बारे में है! जो अपने प्यार कि तलाश में है! और उस प्यार कि तलाश में वो लड़का बहोत कुछ करता है! जिसके वजह से वो अपने दोस्तों और जाने वालो के नजरो में मजाक का पात्र बन जाता है!

यह किताब भावनाओ कि एक यात्रा है और इस यात्रा में हर तरह का भावनाए और एहसास है!  और साथ ही एक प्यार कि कहानी भी, जो कहाँ से सुरु होती है और कहाँ तक जाती  है! जब आप इसके बारे में जानोगे, तब आप कभी हसोगे, तो कभी आप की आंखे नम हो जाएँगी तो कभी आप रोमांचित हो जाओगे!

और ज्यादा  आगे क्या बोलू, कुछ मेहनत आप भी करो, थोड़ा समय निकलो और ये किताब पढो! उसके बाद आप को सब कुछ समझ में आजायेगा!

प्र. जब आप ये किताब लिख रही थी तब आपके मन में क्या चल रहा था?

दर्द,

दर्द और सिर्फ दर्द,

प्र. आपने इस किताब को कितना समय दिया?

हाहाहा…..

मैंने सोचा था! इसे मैं 3 महीने में ख़तम कर दूंगा! पर देखते ही देखते कब 3 साल निकल गये, इसका मुझे पता भी नहीं चला, और सायद ये किताब कभी पूरा भी नहीं हो पता, अगर मैं माया से नहीं मिलता!

प्र. क्या कोई ऐसा पल आया जब आपने सब छोड़ने का मन बना लिया हो?

बहोत बार ऐसा हुआ! एक समय तो ऐसा लगा कि मेने गलती कर दी! पर जब से माया (जेनिफर) आई, उसके बाद फिर मेरा कीबोर्ड कभी नहीं रुका!

प्र. आलोचना को कैसे सँभालते हैं?

इसमे हैंडल क्या करना है?

आसान ही तो  है!

जिन्होंने सराहना किया, उनका मैं दिल से सुक्रियादा करता हूँ!

और जो नहीं करते, उन्हें मैं अपने दोनों हांथो को जोड़ कर प्रणाम करता हूँ! कि उन्होंने मेरे काम में खामी देखी और उन्होंने मेरा आलोचना कर के मुझे और बेहतर लिखने कि जरुरत है! मुझे इसका एहसास दिलाया!

प्र. ब्लुएरोसे के साथ आपका एक्सपीरियंस कैसा था?

हाहाहा….

अब क्या बोलू यार, जैसे भी है! मेरे पेहले किताब के पब्लिशर है!

इनके साथ के बिना तो सायद मेरी किताब आती भी नहीं! तो मैं ब्लू रोज का जितना भी सुक्रियादा करू, वो उतना ही कम होगा!

बाद बाकी अगर आप को भी मेरा एक्सपीरियंस महसुस करना है!

तो मैं कहूँगा, आप भी ब्लू रोज के साथ एक-दो किताब पब्लिश करवाये और खुद जान जायें!

प्र. नए लेखकों को क्या राय देना चाहेंगे ?

कुछ नहीं भाई,

अभी तक मैं खुद ये नहीं समझ पाया हूँ कि लेखक का मतलब क्या होता है!
तो मेरा इसके उपर किसी भी तरह का टिप्पणी करना!
मुझे पेहले से भी और ज्यादा बेवकूफ बना देगा!
तो मुझे इस सवाल से दूर ही रेहने दो!

पर एक बात जरुर केहना चाहूँगा! अगर आप किसी भी तरह का नशा करते है! तो मेरी आप से विनती है! वो ना करे, क्यों कि नशा आप को दिमागी और मानशिक रूप से कमजोर कर देती है! जो कि आप के काम और जिंदगी, दोनों के लिये अच्छा नहीं है! बाद बाकी जिंदगी छोटी सी है! जैसी भी आप की मरजी हो, वैसे जियो! बस कोसिस करो कि ऐसे जियो, कि जब भी आप का अंत समय आये, तब आप को किसी भी बात पर पचताना ना परे!

बाद बाकी सब को मेरी तरफ से प्यार और दुनिया में शांति कायम रहे, इसके लिये मैं इशवर से प्राथना करता हूँ!

पुस्तक आलोचना: Idiot फाइंडिंग लव ऑन फेसबुक

 

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