यह कहानी है पंछी की…पंछी जो रहती तो है शहर की झुग्गी-झोपडी में मगर आकाश में उड़ने का हौसला रखती है । उसे बचपन से सिखाया गया है की लड़की का पहला दायित्व उसका घर-परिवार है और विवाह उसका धर्म मगर वो नहीं मानती इन रिवाज़ों को और सवाल करती है हर उस बात पर जहाँ औरत-मर्द में फर्क होता है । वो पूछती है की गृहकार्य केवल लड़की का ही दायित्व क्यों है…. ऐसे ही अनेक सवालों को उठती है जिसका जवाब उसे नहीं मिलता बल्कि उसे चुप करा दिया जाता है मगर वो इन सब के बीच अपना रास्ता बनती है और अपने हौंसले के दम पर निकल पड़ती है अपनी उड़न उड़ने के लिए… मगर वक्त की तेज़ हवा उसे आकाश से सीधे पागलखाने में ला टपकती है । अब क्या पंछी निकल पायेगी पागलखाने से, उड़ पायेगी फिर से अपने हौंसले की उड़ान…. ये केवल पंछी की कहानी नहीं बल्कि ये हमारे समाज की हर लड़की की जीवनगाथा है जो आधुनिक लड़कियों के जीवन में आने वाली हर छोटी-बड़ी समस्याओं पर प्रकाश डालती है । समाज और सपने के बीच के टकराव की कहानी है – वेदना की उड़ान…

किताब के बारे में:

यह कहानी है यथार्थ की जिसे लेखन में रूचि होती है और वह ऐसे लोगो की ज़िन्दगी पे रौशनी डालना चाहता है जिनके बारे में सब अनसुना कर देते हैं । अपनी दोस्त समीक्षा के साथ एक पागलखाने में जाता है और वहां उसकी मुलाकात होती है पंछी से । एक ऐसी लड़की जिसने सारी ज़िन्दगी रिवाज़ों को तोड़ने में लगा दी और अंत में उसे पंछी की तरह आकाश में उड़ने को तो मिला, लेकिन तब जब उड़ना उसे चाहिए ही नहीं था ।

लिखावट और वर्णन:

लिखावट और वर्णन दोनों की अच्छे हैं ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक आवरण और शीर्षक दोनों ही किताब के पन्नो से मेल खाते हैं ।

पेशेवर:

  • सरल भाषा
  • कहानी में एक सिख
  • सुन्दर शब्दों का प्रयोग

विपक्ष:

  • प्रिंटिंग की गलतियां

मेरा फैसला:

इस दुनिया में आते ही, कहीं न कहीं, हर लड़की की परीक्षा शुरू हो जाती है और उसके मरने तक चलती ही रहती है । इस किताब का हर पन्ना पंछी की परीक्षाओं के बारे में बताता है । बहोत ही प्रेणादायक कहानी जो हर एक लड़की को जरूर ही पढ़नी चाहिए ।

रेटिंग्स: 4/5

खरीदिये: वेदना की उड़ान

In Conversation with Chandni Samer

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