ज़िन्दगी एक छोटा सा शब्द… जिसमें हमारा पूरा जहाँ शुरू होता है और शायद खत्म भी । कभी यह ८०-९० साल तक चल लेती है बुलेट ट्रैन की तरह तो कभी यह शुरुवात में ही दम तोड़ देती है । ज़िन्दगी के इस पड़ाव तक मैंने तो इसको एक क्लासरूम समझा है… जो हम सको कुछ सिख देता है और इस दौरान अगर हम कोई गलती करें तो भी ये हमें समझा जाती है एक अध्यापक की तरह । अक्सर हमें यह सजा भी देती है और कभी कभी हसने और मुस्कुराने की हज़ारों वजह भी…
लेकिन इस कक्षा की सबसे रोचक बात यह है की इसके अध्याय तो रोज बदलते ही हैं लेकिन हमें रोज़ एक नयी सबक देके भी जाता है, और इसका सबसे अच्छा विषय है रिश्ते – कुछ अच्छे रिश्ते और कुछ बुरे…. उम्र के साथ साथ हमें अक्सर पाठ्यकर्म देके जाता है कुछ अच्छे और कुछ बुरे जो समय के साथ बदलते गए और बाकियों की तरह मैंने भी इस साल इस क्लास की कोचिंग ली । इसके कुछ बड़े अध्याय हैं… रिश्ते, लड़ाइयां, सच्ची-जूठी मोहबत, गुस्सा । कुछ विषय में अधिकतर फ़ैल हो गया इस कोचिंग की कुछ नोट्स को एक डायरी के पन्नों पे कैद किया है । छोटी सी कोशिश की है इसमें जिससे मेरी छोटी सी झलक नज़र आये ।
लौटूंगा अगली कक्षा के अगली कोचिंग में….

किताब के बारे में:

इस पुस्तक में आपको तरह तरह की कवितायेँ पढ़ने को मिलेंगी जो ज़िन्दगी के अलग अलग पहलुओं को दर्शाती हैं ।

लिखावट और वर्णन:

लिखावट और वर्णन दोनों ही अच्छे हैं । लेखक ने बहोत ही बारीकी से हर एक जीवन के मोड़ को दर्शाया है ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक आवरण व् शीर्षक दोनों की किताब के पन्नों में लिखे शब्दों से मेल कहते हैं ।

पेशेवर:

  • अच्छी कवितायेँ
  • सरल भाषा
  • ज़िन्दगी का वर्णन

विपक्ष:

लिखावट में कुछ और परिवर्तन आने से अच्छा हो सकता था

मेरा फैसला:

इस पुस्तक में आपको बेहद ही अच्छी कवितायेँ मिलेंगी । जो मुझे काफी पसंद आयी वह हैं – रिश्ते तेरे मेरे, यादों का शहर, एवं एक झूठा वादा । इसमें और भी कवितायेँ है जो दिल को छू लेंगी । एक बार पढ़िए, अच्छी लगेगी ।

रेटिंग्स: 3/5

खरीदिये – ज़िन्दगी एक क्लासरूम, रचना एक अधूरी सी

In Conversation with Vijay Singh Rajpurohit

 

 

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