प्र. हमारे पाठकों को अपने बारे में कुछ बताइये |

”दिल की आवाज” में आप सभी पाठकों का हार्दिक स्वागत है। आप लोगों के समक्ष मैं जो विचार रखने जा रहा हूं मुझे उम्मीद है कि आप जरूर पसंद करेंगे। आप सभी जानते हैं कि कोई भी जीव या प्राणी जब इस धरती पर आता​ है उसका स्वभाव वहां के वातावरण के अनुसार हो जाता है।मनुष्य के जीवन में किशोरावस्था की बहुत ही अहम पहलू होता हैं किशोरों का मन-मस्तिष्क बहुत ही स्वच्छ एवं नाजुक होता है ।कुछ ​बुरे संगत या बुरे माहौल के कारण अपने उज्ज्वल भविष्य को पूरी तरह चौपट कर देते हैं क्योंकि उनके विचारों में नकारात्मक संकेतों का समावेश हो जाता है वो सब कुछ दूसरे को देखकर करना चाहते हैं और वैसा न होने पर दुखी ​होते हैं जिससे उनकी तथा परिवार की समस्याएं​ बढ़ती जाती है। अक्सर देखा जाता है किशोरों में काफी गर्मजोशी होता हैं वे छोटे-छोटे ​बतों में गुस्सा कर लेते हैं और किसी भी हद तक जाने से नहीं कतराते दिमागी तनाव को दूर करने के लिए नशा ससेवन व अपनों के प्रति बुरा विचार​ जैसे आदतों के आदि होने लगते हैं और क्षणिक सुख के लिए किसी भी घटना को अंजाम दे देते हैं जिसके फलस्वरूप अपनों  का प्यार आंखों​ से निकलने लगता है और पूरी जिंदगी​ आंसूओं में डूब जाती है। इस लिए मैं कहता हूं, रिश्तों में जितना मिठास हो जिंदगी उतनी ही खुबसुरत​ होगी और जितना विचार अच्छा उतना ही सम्मान मिलेगा तथा  मंजिल उतना ही आसान होगा। बुरा सोच स्वार्थी विचार कुछ पल खुश रख सकता है पूरी जिंदगी नहीं।खुश रहने के लिए जरूरी है अपनों का सच्चा प्यार और प्यार के लिए जरूरी है अच्छा विचार।यदि कोई बुराई​ भी करें तो अपने ध्यान को केंद्रित करें और उस पर विचार करें कि कहीं आप तो गलत नहीं कर रहे हैं यदि आप सही है तो बेकार की बातों से परेशान बिलकुल न हो आप अपने मन को सदा दूसरे के प्रति प्रेम भाव रखेंऔर अपने जरूरतों को समझे किसी से दिल लगाएं तो आपका दिल भले ही टूट जाय परंतु आप किसी का दिल तोड़ने जैसे सोच विचारों से बिल्कूल अलग सोचें आप अपने बात व्यवहारों में मिठास लाएं वरना दिल जब टूटता है तो आखों से पानी नहीं शैलाब निकलते है आपको सोचते हुए आसचर्य होगा कि दिल का दर्द कोई वर्णन ही नहीं ​कर सकता,इतना होता है।जब दर्द का एहसास हो आप देखेंगे​,उसमें जो आनन्द है वह किसी चीज में नहीं है।क्योंकि जिसे दर्द से प्यार हो जाता है उसे जीना आ जाता है पूरी जिंदगी मुस्कुराहट के आंसू दिखते है मुश्किलों का परवाह नहीं होता। सफलता अवश्य मिलती है इसमें कोई शक नहीं।

कुछ इस तरह-

दर्द मुस्कुरा कर सह जाओ सब अपने नजर आएंगे।

उन अपनों में एक नजर ​देखो, छोटे-छोटे सपने नजर आएंगे। 

गैरों में भी छलकेगा प्यार ये वादा है मेरा,

 जिंदगी को मिले हैं हम,ये कहते नजर आएंगे।

प्र. यह किताब लिखने का ख्याल आपके मन में कैसे आया?

अब तक तो मैं सिर्फ यही  सोचता रहा कि बेवजह लोग क्यों परेशान हैं। मुझे लगता है अधिकतर लोग दूसरे का सुख देखकर ज्यादा परेशान रहते हैं खुश तो तब होते हैं जब अगला परेशान हो । प्यार का झूठा दिखावा करके लोग दूसरे को सिर्फ धोखा देते हैं जिससे एक दूसरे के प्रति भरोसा उठता जा रहा है। आजकल प्यार सिर्फ जरूरत बनकर रह गया है प्यार के पवित्रता का मजाक उड़ाया जाता है। यदि प्यार के वास्तविकता को समझा जाये तो हमें लगता है किसी को कोई दुख नहीं होगा। हमें एक दूसरे के प्रति प्यार है तो उसके खुशी के लिए जरूरी है कि हमें थोड़ा कष्ट उठाना पड़े पर ऐसा नहीं है हमें कष्ट नहीं हो ऐसा सोच स्वार्थी कहलायेगा। अपने सिद्धि के लिए प्यार करना बड़ी-बड़ी​ बातों से खुश करना और अपना काम बनाना और ना बनें तो रिश्ते तोड़ देना आजकल ऐसे व्यवहारों के चलते बहुत लोग दुखी है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ ।जिससे प्रेरित होकर मैंने इस शैली में अपने दिल की आवाज को शब्दों में दर्शाया जिससे  सच्चा प्यार पुनः स्थापित हो तथा पाठकों में नयी आशा जागृत हो।

प्र. इस किताब को लिखने की आपको प्रेरणा कहाँ से मिली ?

जब मुझे प्यार में धोखा​ पर धोखा मिलता गया और मैं रिश्तों को निभाने के लिए धोखा खाता रहा फिर भी रिश्ते मुझे ठुकराते गये पर मैं प्रेमवश ये सोचता रहा कि कोई गैरों से नहीं अपनों से ही दुख होता है और अपनों से ही सुख होता है। इस लिए मुझे अपनों से धोखा खाने में कुछ अलग ही आनंद आने लगा क्योंकि मुझे अपने से ज्यादा अपनों का फिकर था। जब उस पर भी अपने लोग मुझसे भिन्न रहने लगे तो मुझे दुख का सहारा लेना​ पड़ा और व्यथित हृदय से आवाजें आने लगी जो किताब बन गया।अब मुझे दर्द में भी खुशी का एहसास होने लगा जिससे मेरी दुनिया बदल गई और मेरे अंदाज भी।

प्र. आपकी किताब क्या बताती है?

“दिल की आवाज” पुस्तक से यह पता चलता है कि हमें जीवन जीने के लिए कितने कुर्बानी देने पड़ते हैं। अपनों के प्रति कैसे विचार रखने चाहिए और कैसे प्यार करने चाहिए तथा कैसे नहीं करने से दुख-सुख का अनुभूति होता है। खुद अपने मार्ग पर कैसे अडिग रहे। यदि हमें मुश्किल हालातों से गुजरना पड़ा तो भी अपने आप को सही मार्ग से विचलित ना होने दे।”दिल की आवाज” पुस्तक में वर्णित सभी उन पहलूओं को दर्शाया गया है जो पाठकों के दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता ।जिस तरह एक पौधा लगाने के बाद यदि उसको पानी न दिया जाए तो वह पौधा सुख कर मर जाएगा ठीक इसी तरह कुछ रिश्ते भी होते हैं जिनमें प्यार और विश्वास का अभाव हो जाय वह रिश्ते टुट कर बिखर जाते हैं।हमें किसी भी रिश्ते को खत्म करने से पहले यह जरूर सोचना चाहिए कि हम अभी तक उस रिश्ते को क्यों निभा रहे थे।

मेरा संदेश,

पतंग सी उड़ती जा रही है जिंदगी,

काल रूपी दहक में पिघलती जा रही है जिंदगी।

हम मगरूर हैं, मंजिलों​के चौराहे पर,

हर कदम पर पथ बदलती जा रही है जिंदगी।

प्र. जब आप ये किताब लिख रही थी तब आपके मन में क्या चल रहा था?

मैं समाज में आत्म विश्वास एवं एक दूसरे के प्रति सच्चा प्यार जगाना चाहता था जिससे हमारे समाज से बुराईयां दूर हो सके और युवा पीढ़ी झूठे प्यार में फंस कर अपना समय एवं भविष्य को बर्बाद न करें।मै इस “दिल की आवाज” पुस्तक में जो दर्द  दर्शाया​ है  वह सचेत करता है कि हम जिस पर भरोसा करते हैं वो हम पर भरोसा करता है या नही। यदि नहीं कर रहा है तो हमें उससे कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए।मैं यह सोच कर इस किताब को लिखा है कि पाठकों को दूसरे से ज्यादा अपने पर भरोसा रखने में मदद मिलेगी।

प्र. आपने इस किताब को कितना समय दिया?

Ans. मैंने​ जब इस पुस्तक को लिखना आरंभ किया तो मैं अनभिज्ञ और अनाड़ी था।जीवन के खेल के दांव-पेच को समझ पाना मेरे लिए आसान नहीं था।पुस्तक लिखने के पश्चात मैंने यह पाया कि किसी भी सामाजिक विषय पर पुस्तक लिखना जितना हम सोचते हैं उतना आसान नहीं है इस लिए मुझे”दिल की आवाज” पुस्तक लिखने में समय का विस्तार करना पड़ा।

प्र. क्या कोई ऐसा पल आया जब आपने सब छोड़ने का मन बना लिया हो?

जब मैं किताब लिख रहा था उस समय बहुत ही संघर्षशील परिस्थितियों से मैं गुजर रहा था ।कभी कभी मुझे ऐसा लगता था कि इस दुनिया में मेरे लिए कोई जगह नहीं है। मै दिखावा करने वालों से बिल्कुल अलग रहना चाहता था नमक मिर्ची मिलाकर बात करना मुझे पसंद नहीं था इस लिए मेरे विचार बहुत कम लोगों से मिलता-जुलता था। मेरे मन में कई बार ऐसा होता था कि क्या फायदा है किताब लिखने से इंटरनेट के जमाने में किताब कौन पढ़ता है कुछ लोग समझाते भी इसी तरह फिर मेरा मन कुछ देर भटक जाता था और लिखना छोड़ देता था मेरे आर्थिक दशा भी कुछ ठीक नहीं था इसलिए पब्लिशिंग की समस्या भी दिखाई देता था फिर भी मेरे साथ घटनाएं​ जैसी घटती थी उसे मैं यादगार​ के लिए कागज पर शायरी के रूप में लिखकर डायरी में नोट करता रहा।

प्र. आलोचना को कैसे सँभालते हैं?

कोई भी व्यक्ति किसी लक्ष्य को हासिल करने की इच्छा बना लिया हो तो उसका सिर्फ  मंजिल दिखाई देता है न कि कठिनाईयां दिखाई देती है और मैं भी यही किया । मेरा मन सिर्फ कुछ करने का था इसलिए मैं मुश्किलों से भी कुछ सिखा और मुश्किलों के सहारे अपने रास्ते पर चलना जारी रखा।मैं सदैव मुश्किलों के बाद सफलता की आशा में खुशी की प्रतिक्षा करता रहा जिससे मुश्किलें​ मेरा साथ देने के लिए भी आगे आने लगी जिससे मेरा मन भी उत्साहित होने लगा।मैं सिर्फ इस बात पर जोर देता हूं कि यदि हौसला बुलंद और दृढ़ विश्वास हो तो दुनिया का कोई भी मंजिल हमसे दूर नहीं है बसरते बुरे प्रभावों व नकारात्मक विचारों से बिल्कूल दूर हो।

लक्ष्य ना ओझल होने पाएं, कदम मिला के चल।

सफलता तुम्हारी कदम, चुनेगी आज नहीं तो कल।

प्र. ब्लुएरोसे के साथ आपका एक्सपीरियंस कैसा था?

ब्लूरोज पब्लिकेशन कम्पनी को धन्यवाद देना​ चाहता हुं मै बहुत-बहुत​ धन्यवादेना चाहता हुं उन ब्लूरोज के सहयोगियों को जो “दिल की आवाज’ मेरे पुस्तक को प्रकाशित करने में भूमिका निभयी।मैं बहुत खुश हुं ब्लूरोज के साथ जुड़कर।मोनिका जी, प्रीति गोस्वामी जी को दिल से धन्यवाध!

प्र. नए लेखकों को क्या राय देना चाहेंगे ?

मैं सभी लेखकों की सलाह का स्वागत करता हूं जो अपने प्रयासों से समाज को नयी ऊर्जा प्रदान करते हैं।क्योंकि पुस्तकें समाज का दर्पण होती है इस लिए मैं सभी लेखकों की सलाह का हृदय से स्विकार व स्वागत करूंगा।

पुस्तक समीक्षा – दिल की आवाज़

 

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