ऐ ज़िन्दगी तुझे छोड़ कर एक दिन तो हमें जाना होगा
ज़िन्दगी पायी है तो, मौत के आगोश में भी पनाह पाना होगा
हमने मोहब्बत की चाहत में ज़िन्दगी को नासूर बना डाला
गम देकर जिगर को, खुद ही मिटा डाला ।
कैसे कहें तुझसे की कोनसा नस्तर हमें चुभ रहा है
बस तू इतना ही जान ले की —– दर्द पिघल रहा है ।

किताब के बारे में:

लेखिका ने इस पुस्तक में बहोत ही बेशुमार शेर, शायरियां, एवं नज़्में लिखीं है । जिस तरह से लेखिका ने हर एक नज़्म को सामने रखा है, वह दिल को छू जाने वाला है । बहोत ही सुन्दर तरीके से हर एक शब्द को प्रकट किया गया है ।

लिखावट और वर्णन:

हर एक नज़्म एवं शेर में शब्द मानो सही जगह पे जा कर ठहर रहे हैं । इस अनुसार, मैं कह सकती हूँ की लिखावट और वर्णन दोनों ही कमाल के हैं ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

लेखिका ने शब्दों के माध्यम से दर्द दिखाया है, तो शीर्षक एक दम सही है । जहाँ तक वर्णन आवरण की बात है, वह भी बहोत ही अच्छा है ।

 

पेशेवर:

  • सही शब्दों का प्रयोग
  • अलग तरह की नज़्में व् शेर
  • दिल को छू जाने वाले

विपक्ष:

थोड़ा और अच्छा हो सकता था

मेरा फैसला:

मुझे ज्यादातर शायरी व् नज़्में पसंद नहीं आती हैं बहोत आसानी से, लेकिन इस किताब ने मुझे मोह लिया । बहोत साडी ऐसी नज़्में हैं जो मुझे काफी अच्छी लगी । एक बार जरूर पढ़ें इसे ।

रेटिंग्स: 3/5

खरीदिये – दर्द पिघल रहा है

जयश्री बेदी जी से बातचीत

Advertisements