मेरी कविता में तो न जाने कितने किरदार है
कितनो की दास्ताँ हकीकत और ईमान है ।

जहाँ जहाँ जब जब जिससे मुलाकात हुई
एक नयी कविता की शुरुवात हुई ।

हर कविता आइना है जिसमें अक्स उनका दीखता है
मेरे शब्दों में दर्द उनका दीखता है

लेखनी भी खूब है दिल तक पहुंच ही जाती है
झाँक कर उसमें हकीकत ले ही आती है ।

फिर वह भला कहाँ रूकती है मोती से शब्दों में बिखर जाती है ।
कभी वह दरिया समुन्दर के संगम तक पहुँचती है

तो कभी बारिश की बूंदों में भरकर धरती पर बरसती है।
कभी मजहब की दीवार तोड़ती तो कभी भटकों को संभालती है ।

मेरी लेखनी मेरे हाथों में जरूर होती है पर दुनिया को समझती है ।

किताब के बारे में:

जयश्री बेदी जी के द्वारा एक और पुस्तक जिस में मन भावक कवितायेँ हैं । इसमें आपको वह सब पढ़ने को मिलेगा जो कभी किसी रोज़ आपने महसूस किया होगा ।

लिखावट और वर्णन:

लिखावट और वर्णन के बारे में जितना बताया जाये उतना काम होगा ।लेखिका को शब्दों की अच्छे से पकड़ है, जिसका स्वरुप आप सब के सामने हैं, इस पुस्तक के रूप में ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक आवरण बेहद ही दिलचस्प है जिसपे कवित्री की फोटो है । शीर्षक भी कविताओं से मेल खता है ।

पेशेवर:

  • सही शब्दों का प्रयोग
  • दिल को छू जाने वाले

विपक्ष:

मुझे इसमें कुछ भी ख़राब नहीं लगा

मेरा फैसला:

इस पुस्तक में आपको बेहद ही शानदार कवितायेँ पढ़ने को मिलेंगी । जो मुझे काफी पसंद आयी वह हैं – तन्हाई, मेरा प्यार, एहसास, ख्वाब, सबक, धड़कन, एवं आँचल । बाकि कबिताएं भी अपनी जगह बेहद खूबसूरत हैं ।

रेटिंग्स: 4/5

खरीदिये – तुम तो मेरी हो

 

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