किसी का इंतज़ार करना दुखपूर्ण है, कुछ कहते हैं भूल जाना दुखद है परन्तु सबसे अधिक दुःख तब होता है जब आपको मालूम न हो की इंतज़ार करें या भूल जाएँ । तलाश सिर्फ सुकून की होती है, चाहे रिश्तों का नाम कुछ भी हो । ज़िन्दगी की लम्बाई सिर्फ उन पलों तक ही सीमित है, जिसमें आप सच में जीते हैं, ज़िंदादिली और ज़िन्दगी से भरपूर अपने प्यार के साथ । जो अगर मेरे पास एक गुलाब उतनी ही बार हो, जितनी बार मैं तेरे बारे में सोचु, तो मैं सारी उम्र गुलाबों को ही चुनता रहूं ।

किताब के बारे में:

इस पुस्तक में आपको अलग अलग कहानियां पढ़ने को मिलेंगी । इन कहानियों में छिपी वास्तविकता अपनी सी लगती है । अलग अलग रिश्तों में कैसी दूरियां आ रही हैं – लेखक ने बहोत ही बखूबी ढंग से दिखाया है ।

लिखावट और वर्णन:

लेखक ने कहानियों का एवं पात्रों का वर्णन अच्छे ढंग से किया है । हर एक कहानी एक अलग सन्देश बताती है । किन्तु लिखावट थोड़ी और बेहतर हो सकती थी । कुछ मुद्रण गलतियां भी हैं जिन्हें अगली बार सुधारा जा सकता है ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

शीर्षक कहानियों से मेल खता है परन्तु आवरण थोड़ा और बेहतर हो सकता था ।

पेशेवर:

  • सरल भाषा
  • हर कहानी में एक सिख
  • सुन्दर शब्दों का प्रयोग

विपक्ष:

  • भाषा में गलतियां

मेरा फैसला:

बदलाव के इस दौर में, रिश्तों में कुछ नहीं बचा है । चाहे फिर वह पति पत्नी का हो या माँ बाप का । इस पुस्तक की कहानिया इसी बदलाव को दर्शाती हैं । बहोत ही सिंपल तरीके से लेखक ने कुछ न कुछ सिख दी है इन कहानियों में ।

रेटिंग्स: 4/5

खरीदिये – क्या खोया क्या पाया

In Conversation with Dr. Vinod Kumar Bhagat

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