किताब का शीर्षक है “धूमिल”, इस किताब में कुछ ऐसे ही ख्यालों से भरी कवितायेँ हैं । ज़िन्दगी की दौड़ में जब हम खुद को अकेला पाते है तो सोचते हैं कुछ पल वक्त देते हैं खुद को और उन चीज़ों के बारे में सोचते हैं जो चीज़ें धुंदली हो चुकी है, उन धुंधले नज़रों को कविताओं में ढालने का प्रयास किया है । एक साल का मेरा ये सफर पर अनुभव १३ सालों का है । कुछ अनुभव बाँटें हैं इस में , कुछ तजुर्बे आपको अपने से लगेंगे, कुछ कवितायेँ हो सकता है मानो आपके लिए ही लिखी गयी हों । यह किताब मेरा पहला प्रयास है मेरी सोच किसी के साथ बांटने का…

उम्मीद है आपको पसंद आएगी ।

किताब के बारे में:

सुयश की कलम से निकली कवितायेँ दिल को छू लेनी वाली हैं । इन कविताओं में अपनापन सा लगता है । ऐसा लगता है मानो कवी ने वह सब लिखा है जो हमारे साथ हो चूका है । बहोत ही चुन चुन के शब्दों को पिरोया गया है ।

लिखावट और वर्णन:

भाषा सरल है व् शब्दों को बहोत ही अच्छे तरीके से चुना व् लिखा गया है । लिखावट एवं लिखने का ढंग दोनों ही सराहनीये है ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक दोनों ही कविताओं से मेल खाते हैं.

पेशेवर:

  • कविताओं में अपनापन छलकता है
  • शब्द दिल को छू जाते हैं
  • भाषा सरल है

मेरा फैसला:

इस किताब में आपको ६८ तरीके की अलग अलग कवितायेँ मिलेंगी. हर कविता ज़िन्दगी का एक अलग रूप दिखती है । जो मुझे सबसे अच्छी लगी वह है – बिखर जाता हूँ, मैं सितारा बन जाऊं, मैं हूँ अँधेरा, वक्त, नाराज़गी, व् गम । अगर आपको भी कवितायेँ पढ़ने का शौंक है, तो यह पुस्तक आपको काफी पसंद आएगी ।

रेटिंग्स: 3.5/5

In Conversation with Suyash Mishra 

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