इस उपन्यास के जरिये, मैंने गावों की हालत, ग्राम – प्रधान की मानसिकता, जनता के प्रति उसके दायित्वों को अपने ईमानदार देशवासियों के सम्मुख रखने का प्रयास किया है जो मैंने खुद अनुभव किये हैं । मेरा मकसद किसी व्यक्ति विशेष को ठेस पहुंचाना नहीं है । यदि समझने के लिहाज की बात करू तो मैंने गावं के लोगों की पीड़ा, उन लोगों के सम्मुख रखने का प्रयास किया है जो इनके लिए अपने कर्तव्यों को समझते हैं तथा मैं बस उस तत्व के सामान हूँ जिसने न सिर्फ इन घटनाओं को देखा है बल्कि कुछ हद तक किसी समय में झेला भी है और अपनी बात उन सम्मानीय व्यक्तियों तक पहुंचना चाहती हूँ अव्यवस्थित व्यवस्थाओं में सुधार करने के इच्छुक हैं । मैंने गावं के गरीबों की स्थिति सरल शब्दों में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है । सरकार द्वारा गरीबों को कई महत्वपूर्ण अधिकार मिले हैं परन्तु यही अधिकार उनके हाथों तक पहुंचते – पहुंचते क्या रूप धारण कर लेते हैं, इस पर एक विचार किया है । गरीबों की सुविधाओं को दिन – प्रतिदिन बढ़ाया जा रहा है फिर भी उनकी स्थिति बद से बत्तर होती जा रही है । इस ओर मैंने कुछ सम्मानित विशेषज्ञों का ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया है । एक तरफ़ा प्रेम में बढ़ती घातक वारदातों के मद्देनज़र, मैंने प्रेम के रिश्तों पे भी एक नज़र डाली है । इस त्रिकोडिये प्रेम कहानी में, आज के तीन युवा, अपने सुलझे व् विस्तारपूर्ण मस्तिष्क का परिचय दे, एक खुशहाल जीवन की ओर चल पड़े हैं । इस प्रेम कहानी की कुछ सालों से देख पाने में अक्षम है यानि देख नहीं सकती । आँखों की कमी उसे हताश अवश्य करती है परन्तु स्तिथियों का सामना करने से रोक नहीं पाती । वह सहस के साथ जीती है । उसका यह जज्बा, जीवन के प्रति सकरात्मकता को दर्शाता है । आंखों की कमी उसे भयभीत होने नहीं देती । यदि यह उपन्यास आप सबको पसंद आया तो इसका अंग्रेजी वर्शन भी आप सबके सम्मुख पेश किया जायेगा । इसके बाद जल्द ही आपके उत्साह को बढ़ाने के लिए आएगी मेरी अगली बुक “व्हाट्सप्प”… यह एक ऐसी कहानी होगी जो सोशल मीडिया के प्रति आपको, आपकी सोच से परिचित कराएगी । ऐसे ही लव स्टोरी “व्हाट्सप्प” पर मिलेगी जैसी आप सोशल मीडिया पर होने के दौरान अनुभव करते हैं ।

 

१. एक आशावादी युवा जिसका जीवन मोहोब्बत की वजह से पूरी तरह बिखर व् बदल जाता है ?

२. ट्रायंगल लव स्टोरी में किसे मिलेगा न्याय ओर कोण रह जायेगा अकेला?

३. एक ग्राम प्रधान कितना ईमानदार है जनता के साथ?

४. एक लाचार को कैसे ठगते हैं सरकार के यह महान?

किताब के बारे में:

बेबाक – हमारे अच्छे दिन – शीर्षक से ही पता लगता है की कहानी कितनी बेबाक है । कहने को तो यह एक लव स्टोरी है, पर इस में आपको सब कुछ पढ़ने को मिलेगा । लोगों पर हो रहे अत्याचार से लेकर उनकी किसी विषय के प्रति सोच । इस पुस्तक में ग्रामीण जीवन के ऊपर ज्यादा बात की गयी है ओर लेखिका ने बहोत ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है । इस कहानी में भावनाओं को बहोत अच्छी तरीके से दिखाया गया है – फिर चाहे वोह प्रेमियों की हो या गांव वासियों की ।

लिखावट और वर्णन:

लिखावट तो लाजवाब है लेखिका की । ओर जहाँ तक सवाल है चरित्र वर्णन का तो लेखिका ने काफी अच्छा काम किया है इस कहानी को प्रस्तुत करने में ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक का शीर्षक एवं आवरण दोनों ही कहानी से मेल कहते हैं ।

पेशेवर:

  • सच्चाई का अच्छे से प्रदर्शन किया है
  • भाषा सरल है
  • चरित्रों को अच्छे से दर्शाया है
  • संवाद बहोत ही मनभावक हैं

विपक्ष:

मुझे कुछ भी बुराई नहीं दिखी

मेरा फैसला:

इस कहानी में प्रेम के साथ साथ ओर भी बहोत कुछ है जो दिल को छू लेता है । जैसे की अंधी होकर भी नायिका स्ट्रांग बनी रहती है । गाँव वाले कैसे अपना जीवन जीते हैं – अपना हक़ न मिलने के बावजूद भी । ओर भी बहोत कुछ है इस कहानी में । पढ़िए तो ओर भी दिलचस्प लगेगी ।

रेटिंग्स: 3/5

पूजा जी से बातचीत

 

 

 

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