‘जीवन एक कठपुतली’ शीर्षक उपन्यास में मैंने जीवन के उस हिस्से का वर्णन किया है जब हम अपना परिवार, जो दुनिया की साडी सम्पतियों से अनमोल है, खो देते हैं । तब हमें पता चलता है की जिनके सहयोग के लिए हम हमेशा तत्पर रहते हैं जोकि उन कठिन परिस्थितियों में हमें बदनसीब समझने लगते हैं और मानवता को भूलकर अपने-अपने रास्ते चलने लगते हैं जबकि हमारा कर्त्तव्य बनता है गिरे हुए भाई को सहारा देना । यही तो जीवन है जबकि लोग अपना-अपना करते-करते एक दिन खुद ही कब्र खोद लेते हैं ।

‘कौशल्या माँ’ के रूप में जो पात्र दिया है वो भी हश्र करने वाला है की एक स्त्री ही स्त्री की दुश्मन बन जाती है । इस उपन्यास के माध्यम से मैंने समाज को सन्देश दिया है की जीवन कभी समाप्त नहीं होता, लोग हलकी सी मुसीबत को पहाड़ बना लेते हैं और सीधे मौत के द्वार पहुंच जाते हैं जबकि इंसान का उद्देश्य जीवन के दिन काटना नहीं बल्कि हर एक मिनट को खुशियों के साथ व्यतीत करने का है ।

‘सेठ’ के रूप में जीवन के आखिरी पड़ाव का कड़वा सच इस उपन्यास में दिया है जोकि हमें सन्देश देता है की धन को जीवन से बढ़कर मत समझो । जब तक जीवन रूपी ताले की चाबी के मालिक आप हो तो उस ताले को बंद ही मत रहने दो । उसे खोलो नहीं तो बुढ़ापे में चाबी इतनी भारी हो जाएगी की आप चाहकर भी उस लॉक को नहीं खोल पाओगे ।

‘खुशीराम’ के रूप में इस उपन्यास में दर्शाया गया है की जीवन लीला भले ही समाप्त हो जाये, हम मौत के द्वार पर चले जाएँ लेकिन जाने के बाद धन तो लूट जाता है मगर हमारे अच्छे-बुरे कामों की यादें कभी कम नहीं होती हैं । उन्हें कोई लूट नहीं पता है बल्कि हमेशा के लिए एक इतिहास बनकर रह जाती है ।

किताब के बारे में:

यह कहानी है विजय की जिसको वक़्त की ऐसी मार पड़ती है की वह टूट कर रह जाता है । उसका परिवार उससे दूर हो जाता है । उसकी नौकरी छूट जाती है । और वह बिखर कर रह जाता है । लेखक ने बहोत ही अच्छे तरीके से सारे भावों को दर्शाया है । चाहे वह दुःख हो, ख़ुशी हो, या फिर बिछड़ना हो । लेखक के शब्दों में आसक्ति महसूस होती है ।

लिखावट और वर्णन:

जैसा की मैंने कहा की लेखक ने बहोत ही सही तरीके से सरे भावों को दर्शाया है तो उनकी लिखावट बहोत ही सराहनीये है । भाषा भी सरल है और किसी भी पाठक को समझने में कोई दिक्कत नहीं होगी ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक शीर्षक कहानी से मेल खता है जबकि पुस्तक आवरण कुछ और मनभावक हो सकता था ।

पेशेवर:

  • भावनाएं अच्छे से दर्शायी गयी हैं
  • सभी पात्रों को अच्छे से दिखाया गया है
  • भाषा सरल है
  • दिल को छू जाने वाली कहानी है

विपक्ष:

  • कहीं कहीं कहानी ऊपर निचे हो गयी

मेरा फैसला:

इस पुस्तक में लेखक ने बहोत ही अच्छे तरीके से भावनाओं को दर्शाया है । जिस तरह विजय हर कठिनाई का सामना करता है वह बहोत ही भावुक है । एक बार इस पुस्तक को जरूर पढ़ें ।

रेटिंग्स: 3/5

रामभजन शर्मा जी से बात चीत

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