‘शब्दों की बहती दरिया’ में मैं, वो तिनका हूँ, जो अभी – अभी घुला है ।

किताब के बारे में:

यह पुस्तक एक कविता संग्रह है । कवयित्री ने बहोत ही बखूबी ढंग से हर एक शब्द बना है । इस पुस्तक में आपको अलग अलग तरह की कवितायेँ पढ़ने को मिलेंगी जो दिल को छू जाती हैं ।

लिखावट और वर्णन:

अर्चना दास ने बहोत अच्छी तरह हर एक लफ्ज़ चुना है । उन्होंने जिस तरह हर एक भावना को व्यक्त किया है वह कबीले तारीफ है ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक आवरण बहोत ही मोह लेने वाला है । पुस्तक आवरण और शीर्षक एक दूसरे से मेल खाते है ।

पेशेवर:

  • मन को छू जाने वाली कवितायेँ
  • मनमोहक शब्दों का चयन
  • सरल भाषा

विपक्ष:

मुझे कुछ भी इस पुस्तक में बुरा नहीं लगा ।

मेरा फैसला:

जैसे की आप पुस्तक शीर्षक से जान ही गए होंगे, शब्दों की बहती दरिया एक ऐसी पुस्तक ही जिस में शब्दों का इस्तेमाल बहोत ही सही ढंग से हुआ है । ऐसा लगता है मानो कवयित्री ने अपने मन के शब्द कविताओं में पिरोएं हो । मेरी पसंदीदा कवितायेँ है – धुंधली होती है छवि, पिता की । इन ६० कविताओं में आपको भी अपनी पसंदीदा जरूर मिलेगी ।

रेटिंग्स: 3/5

 

In Conversation with Archana Das

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