निशा अपने भाई बहेनो में सुन्दर नहीं है किन्तु बहोत योग्य है वह अपने परिवार वालों के लिए प्यार को भी कुर्बान कर देती है और माता पिता द्वारा बताये गए लड़के से विवाह करने का नाटक करती है किन्तु फेरों के समय बेहोश हो जाती है । उसकी बीमारी की खबर उसके भाई बहेनो को गलती का एहसास कराती है तब निशा के अंतिम समय पर क्या सभी लोग माफ़ी मांगते हैं ?

किताब के बारे में:

यह कहानी एक सुशिल और आदर्शवादी बेटी के बलिदानो को प्रतीत करती है । यूँ तो निशा के और भी भाई बेहेन हैं जो उससे काफी सुन्दर है, किन्तु निशा का काम सुन्दर होना उसकी योग्यता ढांक लेती है । निशा को लेखिका ने उस बेटी की तरह दर्शाया है जो अपने परिवार की ख़ुशी के लिए सब कुछ त्यागने पर राज़ी हो जाती है । यह कहानी अटूट प्यार, पश्तात्ताप, लगाव, एवं बिछडाव की कहानी है ।

लिखावट और वर्णन:

उषा शर्मा जी ने सभी पात्रों को अच्छे से दर्शाया है । उन्होंने सारी भावनाओं को भी अच्छे से शब्दों में पिरोया है । परन्तु पुस्तक में बहोत सारी मुद्रण एवं व्याकरण की गलतियां थी ।

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक का शीर्षक कहानी से बिलकुल मेल खता है परन्तु आवरण कुछ और अच्छा हो सकता था ।

पेशेवर:

  • भावनाएं अच्छे से व्यक्त की गयी हैं
  • सभी पत्रों को अच्छे से दर्शाया है

विपक्ष:

  • कहानी कहीं कहीं ऊपर निचे हो रही थी
  • मुद्रण और व्याकरण गलतियां

मेरा फैसला:

यह कहानी हमें प्यार और प्रायचित के बारे में बताती है । शुरू से ही, लड़कियों के साथ भेद भाव होता आया है हमारे समाज में । और ऊपर से अगर लड़की बाकी बच्चों से सुन्दर न हो तब तो उसे कोई पूछता भी नहीं । किन्तु हर बार, जिसको सबसे ज्यादा दुत्कारा जाता है वही लायक निकलता है । यह कहानी बहोत ही साधारण एवं अच्छी है । पाठकों को एक बार जरूर पढ़नी चाहिए ।

रेटिंग्स: 3/5

उषा शर्मा जी से बातचीत

 

 

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