हाल ही में मुझे उषा शर्मा जी से बात करने का मौका मिला । उनकी पुस्तक – तेरा फैसला मेरी ज़िन्दगी – एक बहुत ही भावुक संबंधों का मेल है । यह रहे उनसे बातचीत के कुछ अंश:

प्रश्न: मैं चाहती हूँ आप सबको अपने बारे में कुछ बताएं|

मैं पाठकों को केवल इतना ही कहना चाहूंगी की हमें कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए । हमें ये नहीं सोचना चाहिए की हम कमज़ोर हैं, अकेले है, बल्कि अपनी कमज़ोरी को भी अपनी हिम्मत बना कर आगे बढ़ना चाहिए । जैसे मैंने अपनी कमज़ोरी, गरीबी को अपनी कलम की ताकत बनाया और अकेले ही अपनी पुत्री को भी समाज में एक मुकाम हासिल करवाया । उसी प्रकार आप सब को भी बस हिम्मत से काम लेना चाहिए । जिस प्रकार रात के बाद सुबह का होना अटल सत्य है उसी प्रकार दुखों के बाद सुख आना भी सत्य होता है । परिवर्तन ही जीवन का सत्य है तोह हमें खुद पर भरोसा रख कर अच्छे कार्य करते रहना चाहिए ।

प्रश्न: यह किताब लिखने का विचार आपके मैं में कैसे आया?

मुझे बचपन से ही कहानियां कविताये लिखने का शोक था । मैं कोई घटना सुनती ,देखती तो उस विषय पर अवशेय लिखती। उसी समय मैंने अपनी सहेली के विषय में सुना, उस से बात की वहां बस उसी घटना को कहानी का रूप दे दिया और लिखते लिखते उपन्यास का रूप हो गया।

प्रश्न: इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?

मैं जब भी कहानिया या कवितायेँ लिखती तो घर परिवार से नकारत्मक व्यवहार मिलता तो मेरा मन होता की कुछ ऐसा करू दुनिया में मेरा और मेरे परिवार का नाम हो अपने परिवार के अपने प्रति व्यवहार को बदलने के लिए मैंने उपन्यास लिखना प्रारम्भ किया ।

प्रश्न: आपकी पुस्तक क्या बताती है?

हमारी किताब में एक सामान्य बालिका की कहानी है ,जिसे प्रारम्भ से ही परिवार में तिरस्कार मिला हो वहां कैसे अपनी सेहेन शक्ति और समर्पण की भावना से असाधारण बन जाती है |

प्रश्न: यह किताब लिखते हुए आपके दिमाग में क्या चल रहा था?

मैं एक ऐसे परिवार से हूँ जहाँ लड़कियों का पढ़ना लिखना अच्छा नहीं माना जाता था । वहां समाज से हटकर लेखन कार्य से जुड़ना किसी को भी पसंद नहीं था लेकिन उन हालातों से अलग हटकर मेरे पिताजी ने मुझे प्रोत्साहित किया । एक वास्तविक सच यहाँ भी है की यह किताब तब लिखी गयी थी जब मैं M.A. में पढ़ती थी । 1990 में लिखी हुई यह किताब कुछ मुश्किल कारणों से प्रकाशित नहीं हो पायी थी । मैंने उस समय ३ पुस्तकें, 20 कहानियां और अनगिनत कवितायेँ लिखी थी । मेरे मन में सिर्फ एक ही बात चल रही थी की मुझे समाज में कुछ अलग जगह बनानी है ।

प्रश्न: आप इस पुस्तक को कितना समय दिया करते थे?

मुझे इस पुस्तक को लिखने में करीब 4 महीने का समय लगा था ।

प्रश्न: क्या कभी ऐसा पल आया जब आपने इस पुस्तक को छोड़ने का सोचा हो?

मैंने लड़कियों के साथ होने वाले व्यवहार को बहोत करीब से देखा था और उस पर ही अपनी कलम चलने का प्रयास किया जिस से लड़कियों के हालत में कुछ सुधार हो सके और लड़कियां समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त कर सके|

प्रश्न: आप आलोचना को कैसे संभालती हैं?

मैं सामान्य परिवार से हूँ उस समय हमारे यहाँ बिजली विवस्था भी ठीक नहीं थी । हम लैंप में से पढ़ते थे । एक कमरा और रहने वाले 5 उस पर भी घर में किसी को भी मेरा कार्य पसंद नहीं था । हम छिप छिप कर कागजों में लिखते थे बस जो भी मन के भाव होते थे उन्हें शब्दों में पिरोकर लिख देते
थे । उसके बाद विवाह भी ऐसे गावं में हुआ जहाँ अनेक परेशानियों का सामना भी हमें करना पड़ा । पारवारिक परेशानियों के कारण मैं ऐसे प्रकाशित नहीं करा सकी । अब यहाँ सब मेरी पुत्री के प्रयासों का नतीजा है की मैं लेखन क्षेत्र से जुड़ पायी हूँ ।

प्रश्न: ब्लुएरोसे पब्लिकेशन के साथ आपका अनुभव कैसा था?

ब्लुएरोसे पब्लिशिंग की टीम के सभी सदस्य बहोत ही हेल्पफुल है । मेरा अनुभव उनके साथ कार्य करने में बहुत अच्छा रहा । इसी कारण मैं अपना नया कहानी संग्रह – “कुछ रिश्ते ऐसे भी” – जल्द प्रकाशित करा रही ।

प्रश्न: नवोदित लेखकों को क्या कहना चाहेंगी?

नए लेखकों के लिए बस इतना ही यदि लेखन में अपना कर्रिएर बनाना चाहते है तो साहित्ये में भावों को प्रकट करने के लिए सटीक, सरल भाषा का प्रोयग करें । जो पथोकों के समझ में आ सके उन विषयों पर अपनी कलम चलाइये जो समाज के लिए बिमारी है म्हणत एक दिन में सफलता नहीं देती परन्तु यकीं रखिये एक दिन जरूर देती है . जिसका जीता जागता उदहारण मैं खुद हु क्योकि मैंने यह किताब 1990 में लिखी थी और 2017 में प्रकाशित हो रही है अतःa धेर्ये रखे , सही लिखे , सटीक लिखे और सफलता प्राप्त करे ।.

पुस्तक समीक्षा तेरा फैसला मेरी ज़िन्दगी

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