उषा गुप्ता जी ‘आशीषों के नीड से’ की कवियत्री हैं. मुझे हाल ही में उनसे थोड़ी सी गुफ्तगू करने का मौका मिला. आप भी पढ़िए उनसे की गयी बात चीत का कुछ सारांश:

प्रश्न: मैं चाहती हूँ आप सबको अपने बारे में कुछ बताएं|

मेरा जन्म 4 जुलाई 1940 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के कस्बे कुंदरकी में हुआ । मैंने वर्ष 1961 से जुलाई 2002 तक भोपाल में विभिन्न शासकीय शालाओं में शिक्षिका के तोर पर कार्य किया । मैं वर्ष 1983 से 1988 के दौरान लायनेस क्लब भोपाल (दक्षिण) में प्रेजिडेंट एवं अध्यक्षा रही । अध्यन, लेखन, समाज सेवा, गृहकार्य एवं पर्यटन में मेरी विशेष रूचि रही है ।

आशीषों के नीड से‘ मेरा प्रथम काव्य संग्रह है । वर्त्तमान में मैं अपने पति श्री कृष्ण मुरारी जी एवं पुत्र, पुत्रवधु एवं पौत्र के साथ भोपाल में निवास कर रही हूँ ।

प्रश्न: यह किताब लिखने का विचार आपके मैं में कैसे आया?

अपने परिवार के हर सदस्य के जन्मदिन पर, विवाह की वर्षगाँठ पर या और किसी विशेष अवसर पर, मैंने उन्हें आशीर्वाद या शुभकामना के रूप में कविता का उपहार ही दिया है । मेरे बेटे ने उन सबको एकत्र करके एक पुस्तक का रूप देने का निर्णय लिया और उसके प्रयास का ही परिणाम है – ‘आशीषों के नीड से’ । यद्यपि इस पुस्तक की रचनाएँ, साहित्य की किसी प्रचिलित विधा के अंतर्गत नहीं आती किन्तु फिर भी इन में कुछ नया अवश्य है, जो सभी पाठकों को अवश्य ही अच्छा लगेगा और उन्हें बार बार पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा ।

प्रश्न: इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?

मैं एक साधारण सी नारी – कभी नहीं सोचा था की कभी किसी कविता की रचना कर पाऊँगी – किन्तु जब मेरी बेटी पहली बार माँ बानी तब हर्षातिरेक से भावनाओं का सैलाब ऐसा उमड़ा की अनायास ही मन में कुछ हलचल सी समां गयी । उसे व्यक्त करने के लिए मैंने अपने किसी प्रिय की सहायता से उस शिशु के लिए चार पंक्तियाँ लिखी –

“तू नव प्रसून है जिसका, वह मेरे नभ का तारा ।

इसीलिए तेरे सम मुझको जग में कोई न दुलारा ।”

बस । इन पंक्तियों से ही मुझे प्रेरणा मिली |

प्रश्न: आपकी पुस्तक क्या बताती है?

आशीषों के नीड से परिवारी शुभकामनायें जैसे जन्मदिवस, विवाह, नववर्ष आदि पर परिवार के सदस्यों को दिए जाने वाले शुभाशीषों का काव्य संग्रह है । सभी काव्य सरल एवं निर्मल भाषा में लिखे गए हैं एवं प्रत्येक उम्र के सदस्य के लिए इस संग्रह में कुछ न कुछ है । यह शुभाशीष मात्र शुभकामना ना होते हुए अत्यंत ही प्रेरणादायक एवं जीवन के हर पारिवारिक रिश्ते को निभाने का दर्शन भी है । यह पुस्तक एक पारिवारिक धरोहर है जो बरसो तक स्नेह का सौरभ बिखेरती रहेगी ।

प्रश्न: यह किताब लिखते हुए आपके दिमाग में क्या चल रहा था?

इस काव्यसंग्रह में 101 कविताएं है जो मेरे दिल के उदगार हैं । यह सभी सुभाशीष, उस काल की परिस्थिति एवं मनस्थिति के अनुरूप लिखे हैं जिससे परिवार के सदस्य गुजर रहे हैं – जैसे किसी वर्ष वे जीवन के कड़े पथ से गुजर रहे हैं तो समबलात्मक शुभाशीष या कभी उन्होंने जीवन का नया मार्ग चुना या उनके सामने नए अवसर आ रहे हैं तो मेरे आशीष काफी आशावादी एवं प्रगतिशील हो जाया करते थे ।

प्रश्न: आप इस पुस्तक को कितना समय दिया करते थे?

आशीषों के नीड से मेरे द्वारा विगत 30 वर्षों के दौरान दिए हुए शुभआशीषों का संकलन है ।
किन्तु 30 वर्षों के दौरान लिखे हुए शुभआशीषों को विभिन्न प्रियजनों से एकत्रित करना एक कठिन कार्य था । दूर के परिचितों से तो यह एकत्रित करना संभव नहीं था, अतः अत्यंत परिचितों एवं परिवार वालों से निवेदन करने पर, उन सबने भी काफी परिश्रम कर अपने पिटारे से कुछ शुभकामना कार्ड निकाल कर दिए ।
उन सभी शुभआशीषों को क्रमवार जमाना पुनः एक बड़ा कार्य था पर यह कार्य मेरी पुत्रवधु ने किया । टाइपिंग का कार्य हमारे घनिष्ठ पारिवारिक मित्र के कार्यालय में समंपन्न हुआ । इस संकलन की पूरी प्रतिक्रिया में लगभग ९ माह का समय लग गया । जिस तरह नवजात शिशु 9 माह गर्भ में रहकर दुनिया में आता है, उसी प्रकार यह काव्यसंग्रह भी हम सभी के 9 महीने के प्रयासों का एक मधुर फल है ।

प्रश्न: क्या कभी ऐसा पल आया जब आपने इस पुस्तक को छोड़ने का सोचा हो?

मैंने तो सोचा भी नहीं था मेरे इन आशीवर्चनों को मेरे बच्चे संभल कर रखेंगे । मेरे बेटे ने उन सबको एकत्र करके एक पुस्तक का रूप देने का निर्णय लिया और उसके प्रयास का ही परिणाम है – आशीषों के नीड ।

प्रश्न: आप आलोचना को कैसे संभालती हैं?

सकारात्मक एवं प्रोत्साहनात्मक ढंग से ।

प्रश्न: ब्लुएरोसे पब्लिकेशन के साथ आपका अनुभव कैसा था?

बेहद अच्छा ।

प्रश्न: नवोदित लेखकों को क्या कहना चाहेंगी?

प्रयास, संतोष, और संयम से ही सत्ताही सुख की प्राप्ति होती है ।

पुस्तक समीक्षा आशीषों के नीड से

Advertisements