अपने परिवार के हर सदस्य के जन्मदिन पर, विवाह की वर्षगांठ पर या और किसी विशेष अवसर पर, मैंने उन्हें आशीर्वाद या शुभकामना के रूप में कविता का उपहार ही दिया है.

‘आशीषों के नीड से’… यद्यपि इस पुस्तक की रचनाएँ, साहित्य की किसी प्रचलित विधा के अंतर्गत नहीं आती किन्तु फिर भी इनमें कुछ नया अवश्य है, जो सुधि पाठकों को अवश्य ही अच्छा लगेगा और उन्हें बार बार पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा. ….. उषा गुप्ता

किताब के बारे में:

उषा जी ने यह किताब बड़े ही प्यार और स्नेह के साथ लिखी है. इस किताब में उनके परिवार के प्रति उनका प्यार छलकता है. इस किताब में उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के लिए कवितायेँ लिखी हैं जो उनके जीवन के सुन्दर लम्हों से जुडी हैं, फिर चाहे वो जन्मदिन हो या सालगिरह. ये कवितायेँ दिल को छू जाने वाली हैं.

लिखावट और वर्णन:

जैसा की मैंने कहा की उषा जी की कवितायेँ दिल को छू जाने वाली हैं, उस में कोई शक नहीं है. उन्होंने हर कविता को इतने प्यार से लिखा है की हर शब्द में उनका स्नेह छलकता है. शब्दों का चयन और बनावट बहोत अच्छे तरीके से की गयी है.

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक:

पुस्तक आवरण एवं शीर्षक दोनों ही कविताओं से मेल खाते हैं. किताब का शीर्षक जहाँ उषा जी के आशीर्वाद का प्रतीत है उधर ही पुस्तक आवरण उनके परिवार का चित्र दर्शाता है.

पेशेवर:

  • कविताओं में अपनापन छलकता है
  • शब्द दिल को छू जाते हैं
  • ये पुस्तक एक हिन्दू परिवार के प्यार को दर्शाती है

विपक्ष:

  • कहीं कहीं जगह कुछ ऊपर निचे हो गया

मेरा फैसला:

जब हम बड़े हो जाते हैं तो अपनी ज़िन्दगी में इतना खो जाते हैं की याद ही नहीं रहता की हमारे बड़े भी बुजुर्ग हो गए हैं और उन्हें हमारी जरुरत है. चाहे हम जितना मर्ज़ी बड़े हो जाएँ कमा ले, लेकिन हमारे बड़ों का आशीर्वाद सदा हमारे सर पे रहेगा. इन कविताओं में एक माँ की ममता, एक सास का प्यार, और एक दादी/नानी का स्नेह छलकता है. हमारे बड़े जब कुछ हमसे कहना चाहें लेकिन कह न पाएं तो ऐसे शब्द सब बयां कर देते हैं. अगर आप भी अपने परिवार से प्यार करते हैं, तो ये पुस्तक जरूर पड़ें.

रेटिंग्स: 3.5/5

उषा गुप्ता जी से थोड़ी सी बातें

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